सुखी जिवन का रहस्य  अगर आप ईस सबाल का जबाब चाहते है। तो आपको ईसे पढना चाहिये जिवन बहुत लम्बा होता अगर उसके सत्य को स्वीकार लीया जाए जिवन क्षन भर मे बित जाता है।  ईस पोस्ट को पढ कर ईसका महत्ब समझ मे आ जायगा आपको पता चलेगा कि जिवन का  अमुल्य ग्याण भी कभी कभी छोट से साघारण ईंसान से मिल जाता है। कभी कभी छोटे मुलाकात भी जिवन को बदल देता है। ग्याण होकर भी हमे कुछ पता नही चलता  सुखी जिवन का रहस्य एक महान सांत हुआ करते थे जो स्वय का आक्षम बनना चाहते थे जिसके लिय वो कई लोगो से मुलाकात करते थे एक जगह से दुसरे जगह जाना पडता था ईसी यात्रा के दोरान एक कन्या बिदुषी से हुई विदूषी ने उनका स्वागत किया और संत से कुछ समय रूक कर आराम करने का आगरा किया संत उनके मिठे बोल बिचार से रूकने का निर्नय लिया  विदुषि ने अपने हाथो का स्वादिस्ट भोजन कराया और उनके अराम करने का बेबस्ता किया खटियाँ पर दरी बिछाया और अपने जमिन पर चटाई बिछा कर शो गई विदुषी को सोते हि निंद आ गईऋ

एक गांव में दो भाई रहते थे ?two brothers lived in a village

 कहानी एक गाँव कि?



 ये कहानी है रामपुर कि ईस गाँव में दो भाई रहते थे बडा भाई  का नाम सिबलाल था और दुसरे छोटे भाई का नाम तपेशर था अपने दोनों भाई हशी खुशी से अपने गाँव में रहते थे 


two brothers lived in a village

दोनों भाई किसान थे अपना खेती कर के कच्छे खाशे अनाज उगाने थे हशी खुशी अपने परीबार के साथ रहते थे आपने सुना होगा हर गाँव मे बगलगीर जरूर होते हैं इनका भी ऐसा ही था उनके बगलगीर उन दोनो भाइयों के खुशी से जलते थे 




तपेशर के घर के बगल में एक बगल गीर था जिसका नाम कुटना लाल था वो घर फोडने मे ऐक्टर और तपेशर सबसे ज्यादा कुटना लाल के साथ हि रहता था एक दिन ऐसा हुआ कि कुटना लाल और तपेशर दोनों शराब पीने गए पिते पिते कुटना लाल ने तपेशर को घर फोडने का गुण मंत्र सिखा दिए 




उस दिन से तपेशर ने उसी बात को लेकर सोचता था एक दिन ऐसा हुआ कि बडे भाई सिबलाल ने बोला तपेशर से तुम जाकर खेत पटा देना तपेशर ने बडे भाई से गुसे मे बोला तुम्हारा नौकर हु क्या सिबलाल ने बोला येसा क्या कह दिया मैने जो तुम मुझसे ऐसे बोल रहा है। इतना कह कर चले गए 





दूसरे दिन भी वैसा ही था कुछ दिन बित गय तपेशर ने अपने भाई से बोला मुझे अलग होना हैं कुछ दिन बाद दोनों भाई अलग हो गए फीर खेत बाटने के लिए दोनों भाई गाँव में एक पंडीत रहता था उसके बोलाने गए तो पंडीत खेत बाटने के लिए आया दोनों भाई गुसे मे लड रहे थे 





पंडीत ने बोला मुझे भुख लगा है पंडित को खिलाने लेकर गए दोनों भाई भी खाए तब तक दोनों भाई गुसे से सांत हो गए असल में पंडीत को भुख नहीं था दोनो भाइयों को गुसे से सांत करने के लिए बहाणा किया था दोनों भाई  बोल रहे थे ऐ खेत मेरा हैं और दुसरे भाई बोल रहा है कि ऐ खेत मेरा हैं 




पंडीत ने बोला कि मै खेत से हि पुछ लेता हूँ कि ऐ खेत किसका है दोनों भाई ने पंडीत से कहा खेत भि बोलता है पंडित ने बोला बिल्कुल अभी मैं पुछ के बताता हुँ। पंडीत ने कान लगाकर पूछा और दोनों भाई को कहा कि खेत ने बोला मै उसका नहीं हूँ बलकी वो दोनों मेरे है  दोनों भाई ने पुछा कैसे तो पंडीत ने कहा कि खेत ने बोला मैं तो जहा हूँ वैसे ही हूँ मै ईसका कई पिढिओ को खिलाता आ रहा हूँ मैं जहा हूँ वही हूँ पंडीत कि बात सुन कर दोनों भाई भाभुक हो गए फिर से दोनों भाई वैसे ही जिंदगी बिताने लग गए 



🌎हमे ईससे क्या सिख मिरती हैं दोस्तो हमे ऐ सिख मिलती है की किसी के बात पर ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए जिससे कि घर बालो को तक लीफ हो और रिसते मे कभी दरार न आए इत्यादि 

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